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डु प्लेसी की टॉस हटाने वाली बात मान लेने के बाद ऐसे हुआ करेंगे क्रिकेट मैच

साउथ अफ्रीका के कप्तान हैं फाफ डु प्लेसी. हाल ही में भारत के खिलाफ हुई टेस्ट सीरीज को 3-0 से हारने वाले कप्तान. भारत में भारत के हाथों बुरी तरह पिटने के बाद घर पहुंचे डु प्लेसी ने इस हार का अजीबोगरीब कारण दिया है. लगातार सात बार टॉस हार चुके डु प्लेसी ने कहा कि टेस्ट मैचों में टॉस नहीं कराना चाहिए.

रांची टेस्ट से पहले डु प्लेसी लगातार छह बार टॉस हार चुके थे. इसके बाद वह इस टेस्ट में टॉस के लिए प्रॉक्सी कैप्टन टेंबा बवुमा को लेकर आए थे. हालांकि प्रॉक्सी कैप्टन भी डु प्लेसी को टॉस नहीं जिता पाया. टॉस के बाद डु प्लेसी ने मैच और सीरीज भी गंवा दी.

यहां से वापस अपने देश पहुंचे डु प्लेसी ने एक बार फिर टेस्ट क्रिकेट से टॉस को हटाने की मांग कर दी. पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ मिली रिकॉर्ड हार के बाद टेस्ट क्रिकेट से टॉस को हटाने की अपील करने वाले डु प्लेसी ने फिर से कहा कि टेस्ट मैचों में टॉस नहीं होना चाहिए. डु प्लेसी ने कहा, ‘हर मैच में वे पहले बैटिंग करते थे, 500 रन बनाते थे. अंधेरा होने पर पारी घोषित कर देते थे, अंधेरे में तीन विकेट झटक लेते थे और जब तीसरे दिन का खेल शुरू होता था तब आप प्रेशर में होते हैं. यह हर टेस्ट में कॉपी-पेस्ट जैसा था. अगर टॉस हटा लिया जाए तब अवे टीमों के पास बेहतर मौका होगा. साउथ अफ्रीका में मुझे कोई परेशानी नहीं है, हम वैसे भी ग्रीन टॉप (हरे विकेट) पर बैटिंग करते हैं.’

BCCI@BCCI

Virat Kohli called it a no-brainer to bat first at the Toss @Paytm ????

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9:17 AM - Oct 19, 2019

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डु प्लेसी के इस बयान पर काफी हंगामा मचा था. खासतौर से भारतीय फैंस ने जमकर उनका मजाक बनाया था. लेकिन आंकड़े देखें तो डु प्लेसी गलत नहीं कह रहे. भारत में खेले गए पिछले 10 टेस्ट मैचों में सिर्फ तीन बार टॉस हारने वाली टीम को जीत मिली है. दो बार ऐसा करने वाली टीम भारत थी जबकि एक बार अफगानिस्तान ने आयरलैंड को हराया था. किसी भी फॉरमेट की क्रिकेट में पहले बैटिंग करने वाली टीम अक्सर फायदे में रहती है. भारतीय उपमहाद्वीप की पाटा पिचों पर चौथी पारी खेलना हमेशा से मुश्किल रहा है. जबकि साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया, यानि कि SENA कंट्रीज में भी है. वहां के ग्रीन टॉप पर एशियन टीमें पहले बैटिंग से बचना चाहती हैं.

ऐसे में अगर डु प्लेसी की बात मान लें तो टेस्ट क्रिकेट काफी बदल सकता है. SENA में एशियन देश पहले बैटिंग करने से बचेंगे और SENA कंट्रीज एशिया में पहले बैटिंग पर जोर देंगी. ऐसे में हो सकता है कि रिजल्ट में कुछ बदलाव दिखे. टेस्ट क्रिकेट में घरेलू टीमों का दबदबा कम हो. क्योंकि आमतौर पर पिच घरेलू टीमों के हिसाब से बनाई जाती है. ऐसे में अगर टॉस का फायदा ना मिले तो इस प्रैक्टिस में भी बदलाव देखने को मिल सकता है और क्या पता इससे टेस्ट क्रिकेट और इंट्रेस्टिंग हो जाए.

#चल रहा प्रयोग है

वैश्विक तौर पर टॉस को क्रिकेट से हटाने के प्रयोग पहले से चल रहे हैं. इंग्लैंड की काउंटी सर्किट में विजिटिंग टीम को पहले बैटिंग या बॉलिंग का चुनाव करने की छूट है. इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान ने कायद-ए-आज़म ट्रॉफी में भी इसे ट्राई किया था.

लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर इसे लागू कर पाना अभी दूर की कौड़ी है. वर्ल्ड क्रिकेट की गवर्निंग बॉडी ICC ने इस विकल्प पर विचार किया था. पिछले साल 28 और 29 मई को मुंबई में हुई ICC क्रिकेट कमिटी की मीटिंग में इस पर चर्चा हुई थी. चेयरमैन अनिल कुंबले की मौजूदगी में हुई इस मीटिंग में तय किया गया था कि टेस्ट क्रिकेट में टॉस की व्यवस्था बरकरार रहेगी.

ICC ने एक बयान में कहा था, ‘इस बात पर चर्चा हुई कि क्या टॉस ऑटोमेटिक तरीके से विजिटिंग टीम को दे दिया जाए? लेकिन ऐसा महसूस हुआ कि यह टेस्ट क्रिकेट का एक अभिन्न अंग है जो इस खेल की कथा के एक भाग का निर्माण करता है.’



Posted By:ADMIN






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