Religious  News 

अपने व्यापार का नाम क्या रखें - राशि वर्णानुसार

 

सुचारु रुप से जीवन चलाने के लिए व्यक्ति को कर्म की भूमि पर मेहनत का बीज रोपित करना ही होता है। कर्म करने के उद्देश्य से ही मनुष्यमात्र का जन्म होता है। यही वजह है कि कोई भी व्यक्ति बिना कर्म किए नहीं रह सकता है। कर्म के बिना जीवन उद्देश्यहीन हो जाएगा। कर्म का सिद्धांत केवल मनुष्य पर ही लागू नहीं होता बल्कि यह प्रत्येक प्राणी पर लागू होता है। कर्म करने वाला व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए जीवन को आगे बढ़ाता है। इसके विपरीत जो व्यक्ति कर्महीन है वह दूसरों के आसरे अपना जीवन जीता है।  किसी ने सत्य कहा है कि कर्मशील व्यक्ति सौ साल में मरता है तो कर्महीन व्यक्ति प्रथम दिन ही मर जाता है।

 

पूर्व जन्म के कर्मों के आधार पर व्यक्ति को यह जीवन प्राप्त हुआ है। और इस जन्म में किए गए कर्म हमें आने वाले जीवन के सुखों के रुप में प्राप्त होंगे। देखने में आता है कि किसी व्यक्ति के पास धन नहीं है और वह अपनी मेहनत से सफलता हासिल करता है। जीरों से हीरो बनने की क्षमता ऐसे व्यक्ति रखते है। वही दूसरी ओर ऐसे व्यक्ति भी है जो मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा होते हैं, जिन्हें अपने बाप-दादा की अथाह दौलत मिली है, और जिसे व्यय करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। धनी पुत्र धन का व्यय करने में अपना जीवन गंवा देते है  और एक आम इंसान दो रोटी के लिए मेहनत करते हुए मर जाता है। पूर्वजों से प्राप्त दौलत को पाकर खो देना और कुछ ना होते हुए भी सफल और धनी बन जाना, दोनों ही कर्म सिद्धांत का वर्णन करते है।

 

कोई व्यक्ति जीवन में क्या करेगा? किस व्यवसाय से धन कमाएगा? आजीविका का कौन सा साधन उसके लिए लाभदायक साबित होगा, यह व्यक्ति की जन्मकुंडली से जाना जा सकता है। ग्रह, भाव, नक्षत्र और राशि से व्यक्ति की नौकरी, व्यवसाय और आय के साधनों का विचार किया जा सकता है। जीवन की आजीविका चलाने के लिए किस मार्ग का चयन करना होगा इसका लेखा-जोखा ग्रहों की स्थिति, दशा और गोचर के द्वारा जाना जा सकता है। जन्मपत्री में ग्रह सुस्थित हो, बली हो, और उत्तम स्थिति में हो तो व्यक्ति दिन दौगुणी रात चौगुणी तरक्की करता है। रातोंरात उसका व्यापार सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है और इसके विपरीत होने पर कुशल से कुशल व्यवसायी को भी असफलता का मुंह देखना पड़्ता है।

 

किसी व्यक्ति को अर्श से फर्श और फर्श से अर्श तक पहुंचाने में ग्रहों की भूमिका अहम रहती है। ग्रहों की स्थिति की जानकारी सभी व्यक्ति नहीं रखते है, इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी की सहायता लेनी पड़ती है। एक योग्य ज्योतिषी ही ग्रह, भाव और दशा को देखकर जातक के जीवन को एक नई दिशा देने का कार्य कर सकता है। किसी व्यक्ति के लिए नौकरी करना सही रहेगा या व्यापार यह एक ज्योतिषी सही तरीके से बता सकता है। इस पर भी कौन सा व्यापार करना जातक के लिए लाभकारी और कौन सा हानिकारक रहेगा। यह कुंडली विश्लेषण से जाना जा सकता है।

 

यहां सबसे पहले यह प्रश्न उठता है कि व्यक्ति अपनी नाम राशि से व्यापार करें या जन्म राशि से।

जन्म से लेकर वयस्क होने तक व्यक्ति को कई नामों से पुकारा जाता है। कई बार प्रचलित नाम और राशि नाम अलग अलग होते हैं। वैदिक ज्योतिष पूर्ण रुप से चंद्र नक्षत्र की जन्मराशि पर आधारित ज्योतिष है। जन्मपत्री में जिस राशि में चंद्र स्थिति होता है, उस राशि को जन्मराशि के नाम से जाना जाता है। चंद्र राशि को इसलिए भी सबसे अधिक महत्व दिया गया है क्योंकि चंद्र मन का कारक ग्रह है। मन से ही सभी क्रियाएं, प्रतिक्रियाएं और गतिविधियां संपन्न होती है। नौ ग्रहों में सबसे तीव्र गति से चलने वाला ग्रह भी चंद्र ही है। इसलिए इसका प्रभाव हमारे जीवन पर सबसे अधिक पड़्ता है।

 

जिस कार्य  में मन न लगे या जिस काय्र को करने से मन को प्रसन्नता ना मिलें वह कार्य व्यक्ति अधिक दिन नहीं कर सकता। ऐसा कार्य व्यक्ति के लिए दासता के समान होता है और दासता किसे पसंद होती है। दबाव में आकर व प्रकृति के प्रकोप से किए गए कार्य दासता में किए गए कार्यों के समान ही होते है। घर में जब किसी बालक का जन्म होता है, तो चंद्र स्थिति राशि के वर्ण के अनुसार बालक का नाम रखने की परम्परा सामान्यत: देखी जाती है। कई बार जन्मराशि के नाम को गुप्त रखते हुए, किसी अन्य नाम से बालक को सम्बोधित किया जाता है। जन्मराशि का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के वर्णाक्षरों के अनुसार निश्चित होते है, जिस नक्षत्रचरण में बालक का जन्म होता है, उसे ध्यान में रखते हुए नाम का निर्धारण किया जाता है। अक्सर यह देखने में आता है कि बालक के नामाक्षर से रखे गए  नाम को कोई नहीं जानता है, बालक के घर, बाहर और निकट के व्यक्ति उसे अपने अनुसार कुछ नामों से पुकारने लगते है और आगे जाकर यही नाम व्यक्ति का मूल नाम बन जाता है।

 

जिस नाम से व्यक्ति को समाज और परिवार के लिए जानते हैं, उस नाम का महत्व ज्योतिष में अपना खास महत्व रखता है। वयस्क होने पर व्यक्ति जब यह विचार करता है कि उसे कौन से व्यवसाय का  चयन करना चाहिए और अपने व्यापार का नाम नाम राशि या जन्म राशि किस के आधार पर रखना चाहिए, यहां व्यक्ति के लिए परेशानियां खड़ी होती है, और वह दुविधा की स्थिति का सामना करता है।

 

व्यापार का चयन करने के लिए सर्वप्रथम नामाक्षर पर विचार करना चाहिए। यदि नामाक्षर की राशि और लाभ भाव की राशि दोनों एक दूसरे के मित्र राशियां हों या एक समान राशि हो तो व्यक्ति को उस व्यापार से लाभ होने की स्थिति बनती है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि आपके नाम का प्रथम अक्षर आपके व्यापार का प्रथम वर्ण हो और द्वितीय अक्षर आपके एकादश भाव में स्थित राशि का अक्षर होना शुभ लाभप्रद होता है। इसके विपरीत यदि नामाक्षर राशि से किए गए व्यापार का चयन त्रिक भावों में स्थित राशियों के अनुसार हो तो व्यक्ति को ऐसे व्यापार का चयन करने से बचना चाहिए।  

 

उदाहरण के लिए - अमेरिका का नाम है। अमेरिका का प्रथम वर्ण मेष राशि से हैं और द्वितीय वर्ण सिंह राशि से हैं। मेष राशि व सिंह राशि एक-दूसरे से त्रिकोण भाव की राशियां होने के कारण अतिशुभ है।  यही कारण है कि यह देश आज विश्व में अपनी प्रसिद्ध का परचम लहरा रहा है। इसका नाम इस देश में रहने वाले व्यक्तियों के लिए भी विकास और सफलता की वजह बनता है। इसे एक और उदाहरण से समझते हैं। हमारा पडौसी देश "चीन"। जिसके नाम का प्रथम वर्ण मीन राशि से है और दूसरा वर्ण वॄश्चिक राशि से है। यह दोनों राशियां एक-दूसरे से नवम-पंचम (त्रिकोण) भाव की राशियां होने के कारण शुभ और लाभकारी है।

 

अब अपने देश की बात भी कर लेते हैं। भारत वर्ष के नाम का प्रथम वर्ण धनु राशि और दूसरा वर्ण तुला राशि से है। धनु से तुला राशि का क्रम एकादश होता है, आय भाव स्वयं में वॄद्धि, उन्नति, सफलता का भाव है। धनु से इसका प्रारम्भ होने के कारण हमारे देश में धर्म, धार्मिकता को अधिक महत्व दिया जाता है। और तुला राशि स्वयं में संतुलन की राशि है। ना बुरा करती है, और ना बुरा होने देती है। इस प्रकार दोनों ही राशियां धर्म, न्याय और संतुलन की प्रतीक है। इसी वजह से यहां सर्वधर्म को मान्यता देते हुए, लोकतंत्र के नियमों का पालन किया जाता है। धर्म, जाति और ऊंच-नीच के भेदभाव को दूर करते हुए यहां सभी लोग स्नेह और मेलजोल से रहते है। अपने इसी गुण की वजह से आज भारत विश्व मे धर्मपरायणता का सिरमौर बना हुआ है। इस प्रकार यह देखा जा सकता है कि किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान का नाम उसकी प्रसिद्ध के मार्ग खोल भी सकता है और बाधाओं का कारण भी बन सकता है।

 

अपने व्यापार, संस्था या व्यावसायिक केंद्र के लिए नाम का चयन करते हुए व्यक्ति साधारणत: अन्य बातों का अधिक ध्यान रखता है। इसके लिए अनेक विधियों को प्रयोग में लाने का प्रचलन है। कई बार किसी संस्था के नाम के प्रारम्भ में दो वर्ण एक ही राशि के प्रयोग कर लिए जाते हैं जैसे-एयरटेल। इस नाम का प्रथम वर्ण वॄषभ राशि और य वर्ण वॄश्चिक राशि से है। यह नाम वृषभ राशि से वॄश्चिक राशि तक एक-सातवां स्थान रखता है। प्रथम भाव और सप्तम भाव एक दूसरे से समसप्तक होते है। सातवां भाव साझेदारी का भाव है, समझौतों और करार का भाव है। विदेश का भाव है। इसलिए इस कम्पनी को अपना व्यापार बढ़ाने लाभ कमाने के लिए विदेश तक व्यापार का विस्तार, अन्य कम्पनियों से समझौते, करार और साझेदारी करते हुए आगे बढ़न होगा। 

 

बारह राशियों के लिए वर्णाक्षर इस प्रकार हैं-

मेष राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - नाम अक्षर- चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

इस राशि के व्यक्तियों को कन्या, वॄश्चिक और मीन राशि के वर्णाक्षरों का प्रयोग करने से बचना चाहिए। और इनके लिए 3 अक्षर म, भ और न खास और उपयोगी साबित हो सकते है। 

विवाह, व्यावसाय या साझेदारी करते समय इन राशि के व्यक्तियों के साथ बात आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके विपरीत मेष राशि वालों को इन सब कार्यों को करते समय 'प' और 'ख' अक्षरों वाले व्यक्तियों या इन अक्षरों का प्रयोग करने से बचना चाहिए। शीघ्र लाभ और अच्छे रिश्ते बनाए रखने के लिए इन्हें "म" से शुरु होने वाले नामों के व्यक्तियों या व्यापारिक नाम का चयन करना चाहिए। 

 

वृष राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो नाम अक्षर के होते हैं। इस राशि के व्यक्तियों को तुला, धनु और मेष राशि के वर्णों का प्रयोग करने से बचना चाहिए। इस राशि के लिए सबसे अधिक शुभ अक्षरों में प, ग और य है। और इन राशि के व्यक्तियों को अ, व और र अक्षरों का प्रयोग जहां तक संभव हो नहीं करना चाहिए। व्यापार, विवाह और साझेदारी में इनका वर्णा क्षरों का प्रयोग शुभ फल नहीं देता है। शुभता प्राप्ति और उत्तम परिणाम के लिए इस राशि के व्यक्ति ग" वर्ण का प्रयोग भी कर सकते हैं।  

 

मिथुन राशि के लिए वर्णाक्षर इस प्रकार हैं- का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह है। विशेष रुप से इस राशि के लोगों के लिए दो वर्ण र और श अतिशुभ हैं। मिथुन राशि के व्यक्तियों को क और च वर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए, अन्यथा व्यावसाय, वैवाहिक जीवन और साझेदारी व्यापार में दिक्कतें आती है। इसके स्थान पर स या 'श' वर्ण का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए। 

 

कर्क राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - ही, हू, हे, हो, डा, डी, डु, डे, डो है। कर्क राशि के लोग जब भी अपने लिए व्यापार के नाम की तलाश कर रहे हों उन्हें इन्हीं वर्णाक्षरों का प्रयोग करना चाहिए, अतिशुभता के लिए ये लोग न, श, म और द वर्ण का प्रयोग भी कर सकते है। जबकि इनको अ और प वर्ण प्रयोग नहीं करने चाहिए। ये इनकी हानि करा सकते है। विशेष सफलता के लिए इन्हें

इन्हें श या द वर्ण का उपयोग करना चाहिए। 

 

सिंह राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे है। सिंह राशि के व्यक्तियों के लिए इसके अतिरिक्त भ, य, ल और अ वर्ण भी शुभफलदायक होते है। और जहां तक संभव हो इन्हें ह और र वर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्यवसाय को दीर्घावधि तक चलाने के लिए अ वर्ण का प्रयोग भी किया जा सकता है।

 

कन्या राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - ढो, प, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो है। इस राशि के व्यक्ति अपने व्यापार का नाम बताये गए वर्णों के अतिरिक्त ग, ओ और र वर्ण से भी रख सकते है। परन्तु स और त वर्ण इनके लिए सही नहीं होते है। जबकि लाभ और उन्नति के लिए 'र' वर्ण का प्रयोग अधिक किया जा सकता है। 

 

तुला राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - र, री, रू, रे, रो, ता, ति, तू, ते है। तुला राशि इन वर्णों का प्रयोग करते हुए अपने व्यापार का नाम रख सकते हैं। साथ ही ये श, स, क और घ वर्ण का प्रयोग भी कर सकते हैं। इसके विपरीत च, म और न वर्ण इनके लिए बिल्कुल शुभ नहीं रहते हैं। जबकि ये स वर्ण का प्रयोग अपने व्यापार, जीवन साथी के नाम के वर्ण और साझेदार के नाम के वर्ण का

प्रयोग कर सकते है। इससे लाभ, रिश्ते मजबूत और सफलता प्राप्त होती है। 

 

वृश्चिक राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - तो, न, नी, नू, ने, नो, या, यि, यू है। अ, न और द वर्ण अतिशुभ और प, र और क वर्ण दिक्कतों की वजह बन सकते है। अधिक लाभ के लिए इन्हें 'अ' वर्ण का प्रयोग करना चाहिए। 

 

धनु राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - य, यो, भा, भि, भू, ध, फा, ढ, भे है। श, म, ह और अ वर्ण भी शुभ सिद्ध होते है, परन्तु व और क अक्षर लाभकारी नहीं रहते है। तथा 'अ' अक्षर का प्रयोग इन्हें लाभ देता है।  

 

मकर राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी है। इस राशि के लिए व, ल, ज और ख वर्ण शुभ एवं द, ह और म वर्ण अशुभ होते है। जबकि 'व' वर्ण का उपयोग अतिशुभ श्रेणी में आता है। 

 

कुंभ राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - गू, गे, गो, स, सी, सू, से, सो, द है। क, श, अ और र वर्ण का प्रयोग भी लाभ देता है, एवं ह, प और ड वर्ण नुकसान करते है। साथ ही 'अ' वर्ण उत्तम  रहता है। ह, प और ड इन वर्णों को छोड़ते हुए अपने व्यापार के केंद्र का नाम रखना इनकी आय और सफलता को चार चांद लगा सकता है। 

 

मीन राशि के व्यक्तियों के लिए नक्षत्रानुसार वर्ण - दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, च, ची है। इन वर्णों के साथ साथ इन्हें ह, न और य वर्ण शुभ वर्णों का प्रयोग भी करना चाहिए। ट, म और र वर्ण का प्रयोग इन्हें नहीं करना चाहिए। और 'न' वर्ण का प्रयोग विशेष लाभ के लिए किया जा सकता है। 

उपरोक्त नियमों को ध्यान में रखते हुए यदि आप अपने व्यापार के नाम का चयन करते है तो निश्चित रुप से आपको सफलता प्राप्त होगी। अन्यथा जीवन भर सफलता के लिए संघर्ष करते रहेंगे।  

 



Posted By:Acharya Rekha Kalpdev






Follow us on Twitter : https://twitter.com/VijayGuruDelhi
Like our Facebook Page: https://www.facebook.com/indianntv/
follow us on Instagram: https://www.instagram.com/viajygurudelhi/
Subscribe our Youtube Channel:https://www.youtube.com/c/vijaygurudelhi
You can get all the information about us here in just 1 click -https://www.mylinq.in/9610012000/rn1PUb
Whatspp us: 9587080100 .
Indian news TV