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नेशनल व इंटरनेशनल फेस्टिवल्स में धूम मचाने के बाद केशव आर्य की फिल्म अंतर्व्यथा अब रिलीज के लिए तैयार

बहुत कम ऐसा होता है कि फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाने और अवार्ड पाने के बाद कोई फिल्म सिनेमाघरों में भी रिलीज हो पाती है। लेकिन निर्देशक केशव आर्य की मूवी 'अंतर्व्यथा' की यह खुशकिस्मती है कि फिल्म फेस्टिवल्स का दौरा करने के बाद यह फिल्म दिसम्बर में बड़े लेवल पर रिलीज हो रही है। अब तक दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल,फेस्प्रो फिल्म फेस्टिवल,कलकत्ता इंटरनेशनल कल्ट फिल्म फेस्टिवल,जिफ्फ जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल,बियॉन्ड एअर्थ फिल्म फेस्टिवल जैसे १४ फिल्म फेस्टिवल्स में इसे ८ अवार्ड्स मिल चुके हैं, जिसमे बेस्ट डेब्यू फिल्म मेकर, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्टर के अवार्ड शामिल हैं। 

                    लगभग २० वर्षो से थिएटर से जुड़े रहे केशव आर्य ने काफी शोर्ट फिल्मे भी बनाई हैं, इस फिल्म के को-प्रोडूसर अक्षय यादव हैं।वह इस फिल्म की रिलीज को लेकर बेहद उत्साहित हैं।केशव आर्य कहते है,''इसका प्रोमो काफी लोगों ने देखा है और इसे लोग पसंद कर रहे हैं। फिल्मो को आजकल रिलीज करना बड़ा चैलेन्ज बन गया है,लेकिन मैं खुश हूँ कि हमारी फिल्म रिलीज हो रही है। पहले यह फिल्म केवल फेस्टिवल के लिए बनाई थी,लेकिन अब यह थिएटर में रिलीज होने जा रही है। देश और विदेश के दर्जन भर से अधिक फेस्टिवल्स में इसे दिखाया गया है और बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर सहित कई अवार्ड्स से नवाजा गया है। चूँकि फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली फिल्मो में गाने नहीं होते,इसलिए बाद में हमने सिनेमाघरों में रिलीज के लिए इसमें कई गाने ऐड किये हैं। कबीरा फेम तोची रैना ने इसमें खुबसूरत संगीत दिया है। इसमें कुल चार गाने हैं। फिल्म का टाइटल सोंग काफी प्रभावी है।''

                       डायरेक्टर केशव आर्य फिल्म के तीन निर्माता भरत कवाड़, दिनेश अहीर और दीपक वशिष्ठ के बेहद शुक्रगुजार हैं जो फिल्म 'अंतर्व्यथा' को सिनेमाघरों तक पहुंचा रहे हैं।फिल्म में हेमंत पाण्डेय,कुलदीप सरीन,गुलशन पाण्डेय जैसे कलाकार हैं,जबकि केशव आर्य ने भी इसमें अदाकारी की है। सुशीला मीडिया टेक प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनाई गई फिल्म 'अंतर्व्यथा' की वन लाइनर बताते हुए केशव आर्य कहते हैं,''देखिये, हर आदमी की एक अंतर्व्यथा होती है फिल्म इसी वन लाइनर पर बेस्ड है। हम बचपन में अक्सर झूठ बोल देते हैं, लेकिन मन में यह लगा रहता है कि हमने झूठ बोला है और सारी उम्र इंसान उस झूठ बोलने की गलती को महसूस करता रहता है। अपनी गलतियों को तो इन्सान दुसरे लोगों से छुपा सकता है, लेकिन वह उसे अपने आप से नहीं छुपा पाता. इन्सान को अपनी उस गलती के नतीजे में पैदा हुए अंदरूनी वेदना को झेलना ही पड़ता है। उसे अपने आप से जद्दोजहद करनी ही पड़ती है। यह मूवी यही दर्शाती है।मेरे लिए यह फिल्म बेहद खास है और इसे बनाने में मुझे कई मुश्किलें आईं, मगर मेरा मानना है कि उन्हीं के ख्वाब पुरे होते हैं जिनके सपनो में जान हो, पैरों से कुछ नहीं होता इरादों में उड़ान हो।''

  फिल्म के निर्देशक और एक्टर केशव आर्य ने बड़ी मेहनत, लगन और शिद्दत से फिल्म 'अंतर्व्यथा' बनाई है।



Reported By:Acharya Rekha Kalpdev
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