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काशी :दुनियाकासबसेअनूठायंत्र

काशीभगवानभोलेनाथकीनगरीहै।काशीजिसकाशाब्दिकअर्थचमकनाहै।गोस्वामीतुलसीदासजीनेकाशीकोकामधेनुकानामदिया।सबसेप्राचीनसप्तपुरियोंमेंसेएकहोनेकेकारणयहमोक्षदायिनीहै।इसकीसबसेखासविशेषताहैंकियहभारतकीआत्मागंगाकेकिनारेबसाहुआहै।विश्वकेसबसेप्राचीनएवंजीवंतशहरोंमेंएकहै।काशीकेकण-कणमेंभगवानशिवविराजमानहै।एकसेएकआपदाएंवप्रलयआईपरन्तुइसकाविनाशनाहुआ।इसपवित्रनगरीकीप्राचीनताकाअंदाजाइसीबातसेलगायाजासकताहैंकिजबग्रीसकाएथेंसशहरबसानेकाख्यालभीकिसीकेमनमेंनहींआयाथा, उससमयभीकाशीनगरीअस्तित्वमेंथी।यहांतककिरोमऔरमिस्रभीनहींथे, तबभीकाशीथी।काशीकाएकअन्यनामबनारसभीहै।हरशोक, संताप, पापऔररोगकानाशकरनेवालीतथासबप्रकारकेकल्याणोंकीखानकाशीकोकहागयाहै।

काशीशहरकेरचना

काशीशहरकीरचनाको बारिकीसेदेखनेपरज्ञातहोताहैंकिइसशहरकानिर्माणएकयंत्रकेरुपमेंकरायागयाहै।इसकाआकार, रुपऔरवास्तुहूबहूकिसीयंत्रजैसालगताहै।यहांयंत्रसेअभिप्राय: एकमशीनसेहैं, जोएकनिर्धारितपरिपाटीपरकार्यकरतीहै।सूक्ष्मतासेदेखाजाएतोहमपातेहैंकिपृथ्वीस्वयंएकयंत्रकीतरहकार्यकरतीहै।यंत्रप्रणालीमेंत्रिकोणसबसेमूलयंत्रहै।मशीनोंकानिर्माणकार्योंकोसहजकरनेकेलिएकियागयाहै।एकशहरकोकिसीयंत्रकेस्वरुपमेंइससेपहलेकभीनहींबनायागया।यहीवजहहैंकिइसेअसाधारणयंत्रकहाजाताहै।इसयंत्रकासंचालनएकविशालमानवशरीरकीतरहस्वत: होताहै, इसकासक्रियहोनाआवश्यकनहीं।

सौरमंडलकाछोटास्वरुप - काशीनगरी

काशीनगरीकीयहविशेषताहैंकिइसकीरचनाएकसौरमंडलकीतरहकीगईहै।जैसाकिसर्वविदितहैंकिहमारेसौरमंडलदेखनेमेंएककुम्हारएकचाककेजैसालगताहै।जिसप्रकारमानवशरीरअपनेआपकार्यकरतारहताहैंठीकउसीप्रकारइसकामंथन (shake-up) है।सूर्यसेपृथ्वीकेबीचकीदूरीसूर्यकेव्याससे108गुनीहै।हमसबकेशरीरमें114चक्रहैंजिनमेंसे112हमारेभौतिकशरीरमेंहीहै, परन्तुसामान्यरुपसेकेवल108चक्रहीसक्रियहै।जोव्यक्तिअपनेशरीरके108चक्रोंकोसक्रियकरलेताहै, उसकेशरीरकेशेष4चक्रअपनेआपसक्रियहोजातेहैं।जिन्हेंसक्रियतादेनेकेलिए108तरहकीयोगप्रणालियांहै।बनारसशहरकोइसतरहसेबसायागयाहैंजैसेयहपंचतत्वोंसेबनाहों।भगवानशिवकेविषयमेंयहमान्यताहैंकिशिवयोगीहैऔरभूतेश्वरहै।काशीनगरीकीपरिधिपांचकोसहै।

 

वास्तुशास्त्रियोंकेअनुसारकाशीनगरीकीज्यामितिकईवृतोंकीपरिक्रमाकरनेजैसीहै।यहसकेंद्रितवॄतहै।जिसकीसबसेबाहरकेवृतकीपरिक्रमाकीमाप168मीलहै।भगवानशिवकीनगरीकीरचनाइसीतरहसेबनाईगईहै, इसरचनाकाछोटाप्रारुपविश्वनाथमंदिरहै।वास्तविकविश्वनाथमंदिरकीबनावटकुछइसीप्रकारकीहै।प्राचीनकालमेंइसकीमूलरुपअत्यंतजटिलथा, जोसमयकेसाथनहींरहा।

यहांकेकुलशक्तिस्थलोंकीसंख्या72हजारहै।एकमानवशरीरमेंनाड़ियोंकीसंख्याभीइतनीहीहोतीहै।इसशहरकीनिर्माणप्रक्रियामानवशरीरकेब्रह्मांडकेसंपर्कमेंआनेकेजैसीहै।यहब्रह्मांडियसंरचनाऔरमानवीयशरीरदोनोंकेमिलनकाउत्तमउदाहरणहै।सहजरुपमेंदेखेंतोएकशहरकेरुपमेंएकयंत्रहै।साथहीयहभीकहाजासकताहै, किइसकेमाध्यमसेब्रह्मांडकीसंरचनासेजुड़्नेकेलिएएकछोटेब्रह्मांडकीरचनाकीगईहै।दोनोंकोआपसमेंजोड़नेकेलिए468मंदिरोंकानिर्माणकियागयाहै।इसमेंचंद्रके13माह, 9ग्रह, 4दिशाए, इनसभीकागुणनफल468है।इनमंदिरोंमें54मंदिरभगवानभोलेनाथऔरइतनेही54 मंदिरशक्तियादेवीमंदिरहै।

जिसतरहमानवशरीरमेंआधाभागपिंगलाऔरआधाइड़ाकाहोताहै।सीधाभागपुरुषऔरशेषआधानारीकाहै।इसीवजहसेभगवानशिवकोअर्द्धनारीश्वरकारुपकहागयाहै।एकसमयथाकिजबयहांसभी468मंदिरोंमेंपूजाहुआकरतीथी, इसीकेचलतेयहनगरीविश्वभरमेंयशऔरसम्मानकाकेंद्रबनीहुईहै।इसकेसाथहीयहसंगीत, कला, शिल्प, व्यापारऔरशिक्षाकाकेंद्रबनाहुआहै।देशकेसबसेबुद्धिमानऔरज्ञानीव्यक्तियहांसेहै।इसशहरकेविषयमेंएकओरमान्यताहैकिपूराविश्वभारतीयगणितकेकायलहै, यहगणितबनारससेहीविश्वकोगयाहै।इसशहररुपीयंत्रकेनिर्माणकाविचारअद्भुतऔरअविश्वसनीयतोथापरन्तुसराहनीयभीथा।अपनीइसीआभाकेचलतेविश्वकाप्रत्येकव्यक्तिइसशहरमेंआनाचाहताहै।पौराणिकऔरअद्भुतघटनाओंकायहशहरगवाहरहाहै।वाराणसीजिसेकाशीशहरभीकहाजाताहै, इसकाआध्यात्मिकमहत्व, पौराणिकमहत्वऔरधार्मिकमहत्वहै।हरव्यक्तिचाहताहैंकिअपनेजीवनकाअंतिमसमयवहइसशहरमेंगुजारे।

वाराणसीएक - गौरवशालीनगरी

काशीनगरीकाइतिहासगौरवशालीरहाहै।हजारोंसालोंसेविश्वकेकोने-कोनेसेलोगयहांआतेरहतेहैं।यहवहीस्थानहैंजहांगौतमबुधनेअपनाप्रथमउपदेशदियाथा, इसकावर्णननकेवलभारतीयपुस्तकोंवशास्त्रोंमेंमिलताहै, बल्किविश्वकेकईयात्रियोंनेअपनीयात्राओंकेवर्णनमेंइसशहरकीभूरी-भूरीप्रशंसाकीहै।एकयात्रीकेअनुसारनालंदाविश्वविद्यालयजोआजविश्वकासबसेमहानशिक्षाकेंद्रमानाजाताहैंवहइसशहरमेंउपलब्धकुलज्ञानकीएकबूंदकेजैसाहै।आर्यभट्टजैसेविद्वानयहींसेरहे।हरविषयकीशिक्षायहांदीजातीरहीहैऔरगणितकीशिक्षायहांअपनेचरमपरथी।ज्ञान, कलाऔरआध्यात्मिकताइसशहरकीसंस्कृतिकीपहचानरहीहै।यहांकीमिट्टीमंदिरमेंरखेंतिलककीथालीकेसमानसम्माननीयस्थानदियागयाहै।काशीकेबारेमेंकहाजाताहैंकियहनगरीभगवानशिवकेत्रिशूलपरटिकीहै।यहीवजहहैंकिकहाजाताहैंकिकाशीजमीनपरनहीं, बल्किजमीनकेऊपरहै।इसनगरीकेविषयमेंकहाजाताहैंकिभगवानशिवयहांस्वयंवासकरतेहैं।

कहाजाताहैंकिजोकाशीनगरीमेंप्राणत्यागताहै, वहमोक्षपाताहैइसीलिएयहांपरमरनामंगलहै, चिताभस्मयहांआभूषणसमानहै।गंगाकाजलऔषधिहैऔरवैद्यजहाँकेवलनारायणहरिहैं।काशीअगरभोलेनाथकीहैतोनारायणकीभीहै।इसेहरिहरधामनामसेभीजानाजाताहै।हिन्दूमिथकोंमेंइसनगरीकेमहत्वकावर्णननहींकियाजासकता।बनारसअपनाऐतिहासिकऔरपरंपराकामहत्वरखताहै।यहशहरअपनेआपमेंकईमिथकसमेटेंहुएहैकिकाशीशिवऔरपार्वतीद्वारासृजितभूमिहै।इसेहिन्दूधर्मकानभिस्थलभीकहागयाहै।एककेबादएकअनेककिवंदतियांइसशहरकीगरिमाकोअलंकृतकरतीहै।मानवशरीर, तत्व, आत्माऔरमोक्षमार्गकोमार्गदर्शाताहै।यहांकीऊर्जाकुछऐसीहैकिआनेवालाप्रत्येकव्यक्तिचकितहोहोताहै।



Reported By:ADMIN



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